छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

कृषक उन्नति योजना बन रहा आर्थिक उन्नति का पर्याय: कृषक उत्तर कुमार प्रधान….

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य तेज गति से चल रहा है। महासमुंद जिले में 18 जनवरी तक 182 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से कुल 7 लाख 67 हजार 780 मीट्रिक टन धान की खरीदी किया जा चुका है। अब तक कुल 518507.40 मीट्रिक टन धान का डी.ओं जारी किया गया है। जारी डी.ओ. के विरुद्ध अब तक 297487.26 मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। साथ ही सभी उपार्जन केंद्रों पर टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौलाई, नमी परीक्षण और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था से किसानों में उत्साह है। केंद्रों पर माइक्रो एटीएम से तत्काल नकद निकासी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे धान बेचने की प्रक्रिया आसान और सुगम बनी हुई है।

इसी क्रम में जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलिहादेवरी के कृषक श्री उत्तर कुमार प्रधान ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विष्णु सरकार के सुशासन में किसान ख़ुश हैं एवं कृषि क्षेत्र में राज्य नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि कृषक उन्नति योजना के तहत धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से शासन कर रही है, इससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही कृषि कार्यों को लेकर उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

पहले की अपेक्षा अब धान की खेती में लाभ अधिक मिलने से खेती किसानी को लेकर एक विश्वास भी बढ़ा है, इसके अलावा अंतर की राशि का भुगतान भी समय पर किया जा रहा है, जिसके लिए साय सरकार बधाई के पात्र है। श्री उत्तर प्रधान ने बताया कि उन्होंने कुल 11 एकड़ में कृषि कार्य किया था, जिससे लगभग 200 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ है और इससे प्राप्त राशि से वे जमीन ख़रीदने की योजना बना रहे हैं। धूमाभाँठा धान उपार्जन केंद्र में उन्होंने पहले टोकन में 50 क्विंटल धान का विक्रय किया और आज दूसरे टोकन में उन्होंने कुल 99.60 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि केंद्र पर पहुंचते ही उनकी धान की नमी जांच, तौलाई और अन्य प्रक्रियाएं तुरंत पूरी हो गईं। उन्हें धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही। उन्होंने राज्य सरकार की व्यवस्थाओं की सराहना की।

उपार्जन केंद्र में किसानों को टोकन जारी करने, तुलाई और भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो, इसकी पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बहुत पहले से खेती हेतु जमीन खरीदने की योजना बना रहे थे, लेकिन पूंजी की कमी की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा था, लेकिन इस बार 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से शासन ने खरीद की उससे अपनी आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही उन्होंने बताया कि यह राशि उनके भविष्य में कृषि कार्यों में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने योजना हेतु शासन का पुनः धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि धान की प्रति क्विंटल की दर पर दिया जा रहा यह भुगतान पूरे देश में सबसे अधिक है, जो कि कृषकों के लिए स्वागत योग्य कदम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button